हिमाचल प्रदेश : - कांगड़ा कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व एमडी समेत आठ अधिकारियों पर एफआईआर, जांच में जुटी पुलिस

ऊना जिले में कांगड़ा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड से जुड़े एक पुराने होटल लोन मामले में बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार सहित आठ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (केसीसीबी) से जुड़े एक बहुचर्चित होटल लोन मामले में बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार सहित आठ अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। थाना सदर ऊना में यह एफआईआर जिला मंडी के गांव भूरा, डाकघर राजगढ़ निवासी युद्ध चंद बैंस पुत्र पूरन चंद की शिकायत पर पंजीकृत की गई है।

एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता एक प्रतिष्ठित होटल व्यवसायी है और वह एम/एस होटल लेक पैलेस, विल्ला नलसर मोहल, तहसील बल्ह, जिला मंडी तथा एम/एस हिमालयन स्नो विलेज, मनाली का मालिक है। शिकायतकर्ता ने वर्ष 2016 में कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ऊना से होटल प्रोजेक्ट के लिए करीब 12 करोड़ रुपये का टर्म लोन स्वीकृत करवाया। लोन के बदले दोनों होटल प्रॉपर्टियों को बैंक के पास गिरवी रखा गया था। लोन स्वीकृत होने के बावजूद समय पर पूरी राशि जारी नहीं की गई और अनियमित तथा देरी से किए गए वितरण के कारण होटल प्रोजेक्ट को भारी नुकसान उठाना पड़ा। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित कीमत लगभग 240 करोड़ रुपये थी, जबकि बैंक द्वारा की गई कथित कार्यवाहियों से प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ।

आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी की आरक्षित मूल्य तय करने से जुड़े मूल्यांकन रिकार्ड में हेराफेरी की, जरूरी ऑफिस नोटिंग्स को हटाया गया और कुछ पेज जानबूझकर गायब कर दिए गए। यह रिकॉर्ड बैंक की कस्टडी में थे और इनके गायब होने की जिम्मेदारी बैंक अधिकारियों पर बनती है।

शिकायतकर्ता ने एफआईआर में यह भी आरोप लगाया है कि आरबीआई की गाइडलाइन और कोविड-19 के दौरान लागू मोरेटोरियम के बावजूद वर्ष 2021 में लोन को गलत तरीके से एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके चलते मामला हाईकोर्ट हिमाचल प्रदेश और डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ तक पहुंच गया। शिकायतकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी, जिसमें खुलासा हुआ कि केसीसीबी की रिकवरी शाखा से उसकी लोन फाइल के कई महत्वपूर्ण पेज, विशेषकर रिजर्व प्राइस फिक्सेशन और वैल्यूएशन से संबंधित नोटिंग्स गायब हैं। आरोप है कि यह कृत्य जानबूझकर किया गया ताकि प्रॉपर्टी का मूल्य कम दिखाकर रिकवरी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।

एफआईआर में जिन बैंक अधिकारियों/कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया, उनमें तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर केसीसीबी विनोद कुमार, राकेश शर्मा जनरल मैनेजर तत्कालीन डीजीएम रिकवरी, कुलदीप भारद्वाज डीजीएम रिकवरी, वीनू शर्मा एजीएम, सतीश कुमारी एजीएम, सुरजीत राणा एजीएम, दिनेश शर्मा ग्रेड-III, बाबू राम ग्रेड-IV शामिल हैं।

पुलिस अधीक्षक अमित यादव ने बताया कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान एफआईआर में लगाए आरोपों की गहनता से जांच की जाएगी। कहा कि शुरुआती जांच में बैंक की लोन फाइल, वैल्यूएशन रिपोर्ट, आरटीआई जवाब, रिकवरी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के बारे तमाम पहलू खंगाले जाएंगे।

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