हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार से राशन आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब मांगा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला मंडी में मृ-त लोगों के नाम पर राशन देने के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मृत लोगों के नाम पर जिला मंडी में राशन देने के मामले में राज्य सरकार से उत्तर मांगा है। याचिकाकर्ता ने दायर आवेदन में आरोप लगाया है कि मंडी जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) डिपो में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है। याचिका में कहा गया है कि मृतकों को भोजन दिया गया है। यह अभी भी जारी है


मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता द्वारा दी गई सामग्री (दस्तावेज या रिकॉर्ड) पर विस्तृत प्रतिक्रिया दें। अदालत ने कहा कि सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी होगी अगर आरोप सही हैं। 9 दिसंबर को मामले की सुनवाई होगी।


डेपुटेशन के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट ने फटकारा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के डेपुटेशन से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पाया कि शिक्षा विभाग के 86 और स्वास्थ्य विभाग के 123 कर्मचारी अपनी आधिकारिक पोस्टिंग स्थानों पर तैनात होने के बजाय अन्यत्र, खासकर शिमला जैसे शहरी क्षेत्रों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं।

अधिकारियों द्वारा दाखिल शपथ पत्रों से खुलासा हुआ कि डेपुटेशन की अवधि को सर्विस रिकॉर्ड में दर्शाया ही नहीं जाता है। रिकॉर्ड में अधिकारी को मूल स्थान पर ही तैनात माना जाता है, जबकि वह असल में दूसरी जगह ड्यूटी दे रहा होता है। इससे तबादला नीति को सीधे तौर पर प्रभावित किया जा रहा है।

गंभीर विसंगतियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे सरकारी स्तर पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं। मामले की सुनवाई 8 जनवरी को होगी।
 

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि डेपुटेशन की वर्तमान व्यवस्था से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में पोस्टिंग का उद्देश्य पूरी तरह विफल हो रहा है। अदालत ने कहा कि जो अधिकारी कठिन, दुर्गम, आदिवासी या ग्रामीण क्षेत्र में तैनात किए जाते हैं, वे प्रतिनियुक्ति लेकर शिमला जैसे शहरी क्षेत्रों में वापस आ जाते हैं, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें अभी भी दुर्गम क्षेत्र में ही तैनात दिखाया जाता है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह व्यवस्था अधिकारियों को तीन तक लगातार पोस्टिंग शिमला में हासिल करने का अवसर दे रही है। इससे न केवल तबादला नीति की मूल भावना प्रभावित होती है, बल्कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। अदालत ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण वहां के निवासियों को मूलभूत सेवाओं में कमी का सामना करना पड़ता है और नीति का उद्देश्य अप्रभावी हो रहा है। हाईकोर्ट ने ये टिप्पणियां एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं।

Comments