हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र: ओबीसी आरक्षण पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष में बहस और हंगामा

तपोवन में हिमाचल प्रदेश की चौथी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन, ओबीसी आरक्षण पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष में बहस हुई और कुछ हंगामा हुआ।

सदन में ओबीसी आरक्षण पर सत्तापक्ष और विपक्ष में बहस हुई, साथ ही हल्का-फुल्का हंगामा हुआ। स्थगन प्रस्ताव पर बहस में बैजनाथ के कांग्रेस विधायक किशोरी लाल ने भाजपा को ओबीसी विरोधी बताया, जिसका भाजपा विधायकों ने कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों ने इस मुद्दे पर बहस की।

बैजनाथ के कांग्रेस नेता किशोरी लाल ने बुधवार दोपहर बाद सदन में नियम-67 के तहत चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि ओबीसी का आंकड़ा जुटाया जा रहा है, इसलिए पंचायतों और स्थानीय निकायों के चुनाव करवाने में समय लगेगा। भाजपा को ओबीसी से क्या मतभेद है? भाजपा नहीं चाहती कि ओबीसी लोगों को सही आरक्षण मिलेगा। किशोरी लाल ने कहा कि पहले आपदा से प्रभावित लोगों का पुनर्वास आवश्यक है।

इस पर हस्तक्षेप करते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि किशोरी लाल 25 साल तक पंचायत के प्रधान रहे हैं। वह जमीन से जुड़े हुए नेता हैं। धरातल की परिस्थितियों और मुश्किलों को जानते हैं। इस पर विपक्ष के विधायक रणधीर शर्मा सदन में खड़े हो गए और इस टिप्पणी का विरोध करने लगे। रणधीर शर्मा ने कहा कि इसमें ओबीसी के विरोध की बात कहां से आ गई। चुनाव वैसे भी 2011 की जनगणना पर हो रहे हैं। इस बीच विपक्ष और सत्तापक्ष के विधायकों में नोकझोंक हुई और हल्का-फुल्का हंगामा होता रहा।
सदन में यह हंगामा उस वक्त हुआ, जब सदन में न तो मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू थे और न ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ही सदन में थे। इस नोकझोंक के बीच सभापति संजय रतन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने का अनुरोध करते रहे। सभापति ने इसके बाद बल्ह के भाजपा विधायक इंद्र सिंह गांधी को चर्चा में भाग लेने को कहा तो दोनों पक्ष शांत हुए। वहीं, बाद में चर्चा में भाग लेते हुए धर्मपुर के कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने भी कहा कि ओबीसी का आरक्षण भी तय किया जाना है। ऐसी बातों को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा में बहुत नुकसान हुआ है। यहां आपदा एक्ट लागू है तो इसे समझा जाना चाहिए।

राजनीतिक लोगों की होती हैं चार आंखें : अनिरुद्ध

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बीच में सदन से बाहर जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सीएम को सदन में उपस्थित होना जरूरी है, क्योंकि उनका जवाब भी आना है। यह व्यवस्था से जुड़ा हुआ प्रश्न है। इस पर पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि राजनीतिक लोगों की चार आंखें होती हैं। विपक्ष मुद्दे पर बात करने के बजाय इधर-उधर की बातें कर रहा है। थोड़ी ही देरी में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सदन में पहुंच गए।

पांच गुटों में बंटी है भाजपा, तनाव में जयराम : सुक्खू

सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा गुटाें में बंटी है। जयराम ठाकुर तनाव में हैं। नेता प्रतिपक्ष तनाव में जब रहते हैं तो कई चीजों पर तथ्यहीन बात करते हैं। चर्चा के बीच सीएम सुक्खू ने कहा कि विपक्ष के विधायक जो भी कमियां बता रहे हैं, उन्हें दुरुस्त किया जाएगा। पंचायतों में इससे सही लोग चुनकर आएंगे। सीएम सुक्खू ने कहा कि आपदा राहत के तहत पीडीएनए के तहत अभी तक 451 करोड़ रुपये का ही बजट आया है। भारत सरकार से पैसा लेना मुश्किल काम हो गया है। उन्होंने मंडी में सरकार के 11 साल का कार्यकाल पूरा होने पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम पर कहा कि जिस आत्मनिर्भर हिमाचल की नींव रखी गई है उसके चलते वहां जश्न नहीं, बल्कि सरकार अपना दृष्टिकोण रखने जा रही है।

उप मुख्यमंत्री नहीं आए, अन्य पर भी संशय : जयराम

सदन में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बार-बार पहाड़े की तरह पांच गुटों में भाजपा की बात करते हैं। उप मुख्यमंत्री सदन में नहीं आए हैं। अभी वह पूरे सत्र में नहीं रहेंगे, अन्य पर संशय है। भाजपा एकजुट और एकगुट है। जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों की दिशाएं अलग-अलग हैं। वहीं, जयराम ठाकुर ने सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में इस बात को भी दोहराया कि मंडी में जश्न मनाने की बात का औचित्य सरकार अभी भी सिद्ध नहीं कर पाई है। जिन लोगों के घर उजड़ गए, उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इनका विजन ब्लर हो गया है, अब सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा है। व्यवस्था परिवर्तन के तीन साल का जश्न मनाने के लिए सरकार आपदा प्रबंधन के बजट का दुरुपयोग कर रही है।

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