यहां के किसानों को खुंब निदेशालय सोलन से बीज मिलाकर हर मौसम में गुच्छी उगाने की तैयारी की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश में हर मौसम में दुर्लभ गुच्छी को उगाने की तैयारी चल रही है। साथ ही, कृषि निदेशालय सोलन ने किसानों को गुच्छी का बीज भी दिया है।
जंगलों में पाई जाने वाली दुर्लभ गुच्छी पर अब एक साथ तीन तरह के तापमान में शोध चलेगा। सबसे ठंडे, मध्यम और उच्च तापमान वाले इलाकों में इसे उगाने की तैयारी है। इसे लेकर खुंब निदेशालय सोलन (डीएमआर) ने पालमपुर, सिरमौर और चौपाल के किसानों को गुच्छी का बीज दिया है।
चौपाल जहां ठंडा क्षेत्र है, वहीं पालमपुर मध्यम और सिरमौर सबसे ज्यादा तापमान वाला क्षेत्र है। यदि तीनों क्षेत्रों में इसकी अच्छी पैदावार होती है तो गुच्छी प्रदेशभर में किसी भी तापमान पर आसानी से उगाई जा सकेगी। हालांकि, इंडोर व आउटडोर में गुच्छी को उगाने पर शोध सफल हो चुका है। इसमें डीएमआर की देखरेख में किसान कार्य कर रहे हैं। एक माह में इसमें फ्रूट बॉडी आने की भी उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी अब हर मौसम में मिलेगी। दुर्लभ गुच्छी मशरूम का बीज तैयार करने के बाद इसे और बेहतर बनाने पर कार्य चल रहा है। डीएमआर बंद कमरे में गुच्छी की नई किस्म समेत अन्य गुणवत्ता कार्य पर काम कर रहा है। जबकि किसानों को ग्रीन हाउस में तैयार करने के लिए बीज ट्रायल पर दिया गया है। डीएमआर का दावा है कि अभी तक के चल रहे शोध के अच्छे परिणाम आ रहे हैं।
औषधीय गुण
गुच्छी मशरूम में विटामिन डी, सी, के, आयरन, कॉपर, जिंक व फॉस्फोरस पाया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका सेवन बोन हेल्थ व मानसिक तनाव को खत्म करने में सहायक होता है। दिल के रोगों व शरीर की चोट को भी जल्द भरने में यह लाभकारी है।
अभी तक गुच्छी करीब साढ़े छह हजार फीट से अधिक की ऊंचाई में देवदार, कायल आदि के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगती है। इसे खेतों में उगाना संभव नहीं था। क्योंकि इसका बीज विकसित नहीं किया जा सका था। लेकिन, डीएमआर ने इसमें कामयाबी हासिल की है। अब इसे तीन तरह के तापमान में उगाने पर शोध शुरू कर दिया गया है। - डॉ. अनिल कुमार, विशेषज्ञ, डीएमआर
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