Himachal Panchayat Election : - 9 जिलों की मतदाता सूची अभी नहीं जारी की गई, इसलिए बीडीओ-सचिव देखेंगे पंचायतों का काम

हिमाचल प्रदेश में, बीडीओ और पंचायत समिति एवं जिला परिषद की सीईओ की अध्यक्षता वाली कमेटियों को पंचायतों का कार्यभार सौंपा गया है।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कामकाज देखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी है। पंचायतों की कमान बीडीओ और पंचायत समिति एवं जिला परिषद की सीईओ की अध्यक्षता वाली कमेटियों को सौंपी गई है। पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 140(3)(बी) के तहत पंचायतों का कामकाज खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) बतौर अध्यक्ष देखेंगे, जबकि पंचायत सचिव सदस्य सचिव के रूप में काम करेंगे। हालांकि, प्रदेश में कई स्थानों पर दो से तीन पंचायतों का जिम्मा एक ही सचिव संभाल रहे हैं, ऐसे में बतौर सदस्य सचिव उन पर अतिरिक्त प्रभार रहेगा। उधर, प्रदेश के 9 जिलों के उपायुक्तों की ओर से अभी मतदाता सूचियां ही जारी नहीं की हैं।

सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, पंचायत समिति का कामकाज देखने वाली कमेटी के अध्यक्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) होंगे। खंड योजना अधिकारी (बीपीओ) सदस्य और पंचायत निरीक्षक सदस्य सचिव होंगे। जिला परिषद का कामकाज मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अध्यक्ष, जबकि जिला विकास अधिकारी सदस्य और जिला पंचायत अधिकारी सदस्य सचिव के रूप में देखेंगे। पंचायती राज विभाग के मुताबिक यह आदेश पूरे हिमाचल प्रदेश में प्रभावी होगा। हालांकि, लाहौल-स्पीति के केलांग सब-डिवीजन, जिला परिषद, चंबा के पांगी सब-डिवीजन की पंचायत समितियों और कुल्लू की चार ग्राम पंचायतों को इससे बाहर रखा गया है। इन क्षेत्रों के अलावा अन्य सभी पंचायतीराज संस्थाएं 31 जनवरी को कार्यकाल पूरा होने पर भंग मानी जाएंगी। सेंट्रल फाइनेंस कमीशन ग्रांट (सीएफसी) के तहत भुगतान के लिए सदस्य सचिव मेकर होंगे और समिति के अध्यक्ष चेकर की भूमिका में रहेंगे। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक नई पंचायतें नहीं बन जातीं।

उधर, हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सुस्ती दिखाई दे रही है। 30 अप्रैल से पहले चुनाव करवाने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला उपायुक्तों को 30 जनवरी तक मतदाता सूचियों का प्रकाशन करने को कहा था। सिर्फ तीन जिलों शिमला, चंबा और लाहौल स्पीति के उपायुक्तों ने ही सूचियां जारी की हैं। शेष 9 जिलों के उपायुक्तों ने इन्हें जारी नहीं किया है। वहीं, 45 एसडीएम की ओर से नगर निकायों की मतदाता सूचियां जारी नहीं की गई हैं। 

हाईकोर्ट के आदेशों पर ही सभी डीसी और एसडीएम को मतदाता सूचियों का प्रकाशन को कहा गया था। सूचना मिली है कि कई डीसी और एसडीएम ने मतदाता सूचियां प्रकाशित नहीं की हैं। किन कारणों से ऐसा नहीं किया गया, आयोग को इसकी सूचना नहीं मिली है। उम्मीद करते हैं 2 फरवरी तक यह काम हो जाएगा, क्योंकि 2 को सूचियां प्रिंट भी होनी है। - अनिल खाची, राज्य चुनाव आयुक्त


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