Amar Ujala Samwad : - शिक्षकों ने अभिभावकों और विद्यार्थियों का तनाव कम करने पर चर्चा की।

हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थी बहुत मेहनत कर रहे हैं क्योंकि एग्जाम सिर पर हैं। इस बीच, राजधानी शिमला के शिक्षकों ने अमर उजाला के शिक्षा संवाद में विद्यार्थियों को बहुत कुछ बताया।

परीक्षा जीवन का पड़ाव है, मंजिल नहीं। अंकों के आगे भी एक बड़ी दुनिया है। रविवार को राजधानी शिमला के शिक्षकों ने अमर उजाला के शिक्षा संवाद में विद्यार्थियों और अभिभावकों को संदेश दिया। संवाद के दौरान शिक्षकों ने परीक्षा को लेकर बढ़ते तनाव, सोशल मीडिया की लत और पढ़ाई के असंतुलित तरीकों पर खुलकर चर्चा की और सफलता के व्यावहारिक मंत्र साझा किए। शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि परीक्षा के दिनों में मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। बार-बार नोटिफिकेशन और तुलना का दबाव मानसिक थकान बढ़ाता है, इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि तय समय पर ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें और बाकी समय पूरी एकाग्रता के साथ अध्ययन पर केंद्रित रहें।

संवाद में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पूरे साल निरंतर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी परीक्षा के समय कम तनाव में रहते हैं। अंतिम समय की रट्टा पद्धति से बचते हुए विषयों को समझकर पढ़ने की आदत विकसित करने की जरूरत है। शिक्षकों ने कहा कि परीक्षा के दिनों में संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम, योग मानसिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। अभिभावकों से अपील की गई कि वह घर में खुशनुमा और सहयोगी वातावरण बनाए रखें। अनावश्यक तुलना, दबाव या डर का माहौल बच्चों का आत्मविश्वास कमजोर करता है। इसके बजाय बच्चों के साथ संवाद करें, उनकी दिनचर्या समझें और उन्हें भावनात्मक संबल दें।

शिक्षा संवाद में टाइम टेबल को परीक्षा तैयारी का सबसे प्रभावी हथियार बताया गया। प्रत्येक विषय को पर्याप्त समय देने, छोटे-छोटे लक्ष्य तय करने और नियमित रिवीजन की सलाह दी गई, साथ ही रीडिंग हैबिट बढ़ाने पर बल देते हुए कहा गया कि पढ़ने की आदत से समझ और अभिव्यक्ति दोनों मजबूत होती हैं। उत्तर पुस्तिका में साफ लेखनी, सटीक प्रस्तुति और जहां संभव हो डायग्राम, फ्लोचार्ट या बिंदुओं के माध्यम से वैल्यू एडिशन करने से अंक बढ़ाने के व्यावहारिक टिप्स भी दिए गए। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि आत्मविश्वास, संतुलन और सकारात्मक सोच के साथ की गई तैयारी ही असली सफलता दिलाती है। परीक्षा एक अवसर है, खुद को परखने और आगे बढ़ने का। अंकों से आगे भी एक उजला भविष्य इंतजार कर रहा है।

समय प्रबंधन

परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन अति महत्वपूर्ण होता है। मान लो 85 अंक का प्रश्नपत्र तीन घंटे यानी 180 मिनट में हल करना है। अंतिम 10 मिनट का समय उत्तर पुस्तिका को रिवाइज करने के लिए बचा लें, तो 170 मिनट बचते हैं। एक अंक के प्रश्न को लिखने के लिए दो मिनट के लगभग समय चाहिए। 2 अंक के लिए 4 मिनट और 4 अंक के प्रश्न के लिए लगभग 8 मिनट से ज्यादा समय नहीं मिल सकता है। प्रश्न का उत्तर अच्छे से प्रस्तुत करना जरूरी होता है। जहां जरूरी हो साफ और सुंदर डायग्राम, कैमिकल रियेक्शन और मैथेमेटिकल फार्मूला को लिखना न भूलें।

पूर्व के वर्षों के प्रश्नपत्रों को जरूर करें हल

परीक्षा से कुछ सप्ताह पहले कम से कम पिछले 10 साल के प्रश्न पत्र दो-तीन बार लिखकर जरूर याद कर लें, ताकि परीक्षा में प्रश्न पूछने का तरीका और उसका उत्तर कैसे लिखना है, इसका अभ्यास अच्छे से हो जाए। इस तरह आप अपने ऊपर भरोसा भी कर पाएंगे। अधिक अंक वाले बड़े प्रश्नों, कम अंक वाले छोटे प्रश्नों और आब्जेक्टिव टाइप प्रश्नों को कैसे और कितना लिखना है, इसके लिए कोई हल हुए पेपर या अपने अध्यापकों से परामर्श बहुत सहायक हो सकता है।

समयसारिणी तैयार करना जरूरी

परीक्षा के दिनों में समयसारिणी तैयार करनी चाहिए ताकि नियमित दिनचर्या बन सके। पौष्टिक आहार और अच्छी नींद भी बहुत जरूरी है। पढ़ने के लिए मोटिवेशन होना भी बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि उनके पास विकल्प मौजूद रहें। - सुभाष वर्मा, प्रधानाचार्य, क्रिसेंट पब्लिक स्कूल, टुटू

अभिभावक भी तय करें जिम्मेवारी

छुट्टियाें के दौरान बच्चों का स्कूल से सीधा संपर्क नहीं होता। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उनकी सबसे बड़ी भूमिका यह होनी चाहिए है कि बच्चे बनाई गई दिनचर्या का पालन करें। किताबें पढ़ना भी बहुत जरूरी है। मोबाइल, टेब स्क्रीन के मुकाबले असली पन्ने पढ़ने से जानकारी बेहतर तरीके से याद रहती है। रिवीजन करें। - स्मृति नेगी, शिक्षक, फागली स्कूल।

शिक्षक परीक्षा में तनावरहित माहौल बनाएं

परीक्षाओं के दौरान तनाव और दबाव सहना पड़ता है। परीक्षा के दिन घर से निकलते समय अभिभावक कहते हैं कि अच्छे अंक लाना जरूरी है। परीक्षा हॉल में ओएमआर शीट सही तरीके से भरने का दबाव शिक्षक डालते हैं। इससे वह कई पढ़ी हुई चीजें भी भूल सकते हैं। शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि परीक्षा में तनावरहित माहौल बनाएं - जगदीप बाली, लेखक

कम करें मोबाइल का प्रयोग

सोशल मीडिया पर लगातार चलने वाले वीडियो के कारण विद्यार्थियों तक बहुत सारी जानकारी एक साथ पहुंच रही है। उनकी याद रखने की क्षमता कम हो रही है। जरूरी है कि परीक्षाओं के दौरान जितना हो सके उतना कम फोन चलाएं। फोन की बजाय तनावरहित होने के लिए कोई खेलकूद या अन्य गतिविधि कर सकते हैं। - अराधना, शिक्षक, जेसीबी स्कूल, शिमला

नोट्स बनाकर बेहतर होगी तैयारी

ध्यान और योग तनाव कम करने के लिए सबसे अच्छे उपाय हैं। घबराहट होने पर लंबी सांस लें और धैर्य न खोएं। परीक्षा से पहले पुनरावलोकन के लिए शीर्षक सहित संक्षिप्त नोट्स तैयार कर लें। इससे उत्तर याद रखने में आसानी होगी। बिस्तर के किनारे अपना टाइम टेबल लगाएं और सोने-उठने से लेकर पढ़ने तक का समय तय करें। - रंजीत सिंह रोलक, प्रधानाचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ढली

जिंदगी अंकों से ज्यादा जरूरी

जिंदगी ज्यादा अहम है। अगर परीक्षा में कम अंक भी आएं तो उन्हें सुधारा जा सकता है। परीक्षाओं के दौरान स्क्रीन पर कुछ देखने की बजाय गाने सुनना तनाव कम करने का बेहतर उपाय है। छात्र रोज कक्षा में पढ़ाई गई चीजों को दोहराने की आदत बनाएं। परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया से दूर रहें। पढ़ाई की टाइमिंग सेट करें। - तृप्ता शर्मा, शिक्षक, पोर्टमोर स्कूल

परीक्षा परेशानी नहीं, खुद के आकलन का अवसर

परीक्षाएं खुद का आकलन करने का मौका देती हैं। प्राप्त अंक हमें हमारी खूबियों और कमजोरियों के बारे में बताते हैं जिन पर हमें और अधिक काम करने की जरूरत होती है। विज्ञान के छात्रों के लिए कहानियों के बजाय तथ्यों और समीकरणों पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। नियमित पढ़ाई को अपनी आदत बनाएं। - पंकज शर्मा, जिला विज्ञान समन्वयक, शिक्षा विभाग

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